छाँह घनी रमनी वन बेलि, बनी विधि सौं कहि ऊपमु ना |
दंपति कौं सुख देति सदा, तपनी त्रय त्रापनि की दमुना ||
सखि रूप धरैं सब सेवत हैं, जु सहेलनि की गनती क्रमु ना |
हित सौं परमानंद नित्य जपौं, जै जै वृन्दावन जै जमुना ||