गोकुल को कुल देवता प्यारो गिरिधरलाल।
कमल नयन घन सांवरो वपु बाहु विशाल।।
बेग करो मेरे कहे पकवान रसाल।
बलि मघवाबल लेत है कर कर घृतगाल।।
इनके दिये बाढ़ी है गैया बच्छ बाल।
संग मिल भोजन करत है जैसे पशुपाल।।
गिरी गोवर्धन सेविये जीवन गोपाल।
सूर सदा डरपत रहे जातें यमकाल।।