भजन ( रचना प्रकार ) : रचना सूची
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{ श्री राधाअष्टमी श्रंगार आरती दर्शन ||
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- सबको बहुत बहुत मंगल बधाई हो बधाई हो ॥
कुँवरि  जनमत ही ब्रज-जन फूले तन-मन माई। 
श्री बरसाने गोपराज घर बाजत सुनि है बधाई।।टेक।। 
रानी जग जानी श्री कीरति भाग भरी छबि छाई। 
रूप प्रेम रस अबधि मुख सुखनिधि कन्या जाई।। 
सदन-सदन आनँद महा मंगल शोभा कही न जाई। 
नर नारी हरषे सब ऐसें मनौं रंग निधि पाई।।1।। 
बनि-बनि बनिता भवन-भवन तें चलीं जुरि छबि सौं
राजैं वदन चन्द आंनन्द भरे मानोैं हाथन थार विराजेैं।। 
सौरभ जल सींची बीथी महमहात मन मोहैं।
चंचल गति दामिनी सी भामिनि गावत गीतन सोहैं।।2।। 
आईं श्रीवृषभान भवन जहाँ ऊँचे अटा-अटारी। 
कनक कलश पर धुजा पताका जगमगात छबि न्यारी।। 
बाजत द्वारें ताल पखावत गोमुख दुन्दुभि भेरी। 
गोप कुमार मैन से डोलत बोलत देै-देै हेरी।। 3।। 
कंचन धरनी मणिमय आँगन रँग भरी नारी नाचैं। 
हरषेैं बरषे दधि घृत हरदी छिरकत काहू न बाचेैं।। 
इक गहि चौबा चंदन छिरकेैं इक पय भाजन ढारेैं। 
एक परस्पर माखन लै-लै तकि-तकि हँसि-हँसि मारैं।। 4।। 
इक गावैं एक जंत्र बजावैं इक लै भेटन आवैं। 
इक निकसेैं एक पैठेैं मंदिर निरखि लली सुख पावैं। 
इक कीरति के चरणन गहि-गहि धनि-धनि वचन उचारेैं। 
एक कुंवरि कौ रूप विलोकत तन-मन धन कौं वारेैं।। 5।। 
एक रहीं इकटक लखि शोभा इक तन फूली डोलेैं। 
इक दिखि आवैं आँगन छबि सौं जै-जै बानी बोलेैं।। 
इक पुनि लै-लै मन्दिर में तें गोरस घट ढरकावेैं। 
बहे पनारे न्यारे-न्यारे वीथिन कीच मचावैं।।6।। 
कनक भीत विद्रुम मणि देहरि नग खचे खंभ विराजैं 
लटकत तोरन रतन जगमगैं हाटक फाटक राजैं।।
कहा कहौं सुन्दर मंदिर की सोभा कहत न आवै।
दमकत बनितत के तन चंचल प्रतिविंबित दरसावैं।। 7।।
चारु चँदोवा मुक्ता झालर घर-घर आँगन सोहैं। 
झलमलाइ रही चहुँ दिसि सोभा जो मोहैं। 
को कवि बरनैं महा महोत्सव सुर तिय हिय सरसाने। 
निर्त्तत गावत कुसुमन बरषत सुन्दर श्री बरषने।। 8।। 
बाबा नन्द रु महरि जसोद सुनि-सुनि अति हरषाहीं। 
नन्दलला आनन्द भयौ मन फूले मन हीं माहीं।। 
द्विज मागत बंदीजन फूले जै-जै बानी राजैं। 
गोप सभा के मध्य नृपति मणि श्रीवृषभान विराजैं।।9।। 
जहाँ तहाँ जाकी चलत सुधा-सी निर्मल सुजस कहानी। 
इन्द्र समान सबन पर वरषेैं मुदित बड़ दानी।। 
विप्रन धेनु दई बहु विधि सौं कनक सींग खुर रूपे। 
निरधन धनी किये धन देै-देै देत विचार न भूपेै।।10।। 
भ्राता बन्धु सबै पहिराये देै केसर के टीके। 
भये बिदा सुख भीजे तन मन चलत बिराजत नीके।। 
दान मान सबहिनु कौं दीनोैं जुवती जन पहिराई। 
मुक्तामणि मय कंचन भूषन सारी सुरंग सुहाई।। 11।। 
सब काहू कौं मोद बढ्योै अति भयौ जु मन कौ भायोै। 
पुर-पुर घर-घर नर नारिनु मिलि लोक-लोक जस गायोै।। 
श्रीराधा रसिकन की जीवन प्रगटी सब सुखदाई। 
दामोदर हित श्रीवृन्दावन वास बधाई  पाई।।11।। 43।।

भजन अज्ञात 13/03/2023

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अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
 
पतितो को पावन करते कृपानिधि,
पतितो को पावन करते कृपानिधि,
किए पाप है इस सुयश के सहारे,
किए पाप है इस सुयश के सहारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
 
हमारे लिए क्यों देर किए हो,
हमारे लिए क्यों देर किए हो,
गणिका अजामिल को पल भर मे तारे ,
गणिका अजामिल को पल भर मे तारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
 
 
माना अगम है अपावन कुटिल है,
माना अगम है अपावन कुटिल है,
सबकुछ है लेकिन है भगवन तुम्हारे,
सबकुछ है लेकिन है भगवन तुम्हारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
 
मन होगा निर्मल तुम्हारी कृपा से 
मन होगा निर्मल तुम्हारी कृपा से 
मन होगा निर्मल तुम्हारी कृपा से 
इसे शुद्ध करने मेराजेश हारे
 
अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
 
भजन अज्ञात 07/09/2023

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धरि ध्‍यान सुनो धनुधारी, गारी मिथिला की
श्री रघुबर अवध बिहारी, गारी मिथिला की

मग मह मुनि तिय मध्य शिला के, प्रकट करी पग धुलि छुला के
हो राजकुंवर या मदारी, गारी मिथिला की
धरि ध्‍यान सुनो धनुधारी, गारी मिथिला की

धनुष यज्ञ सुनि ब्‍याह उमंग में, बिनु चिट्ठी कौशिक मुनि संग में 
बनि आये कमंडल धारी, गारी मिथिला की 
धरि ध्‍यान सुनो धनुधारी, गारी मिथिला की

सुन्‍दरता अभिमान में सीना,तानि चले पर आयो पसीना 
निरखी जब जनक दुलारी, गारी मिथिला की
धरि ध्‍यान सुनो धनुधारी, गारी मिथिला की

दा‍नी शिरोमणि महिमा मण्डित, फुलवारी में पुष्‍प चयन हित
बने मलियन आगे भिखारी ,गारी मिथिला की
धरि ध्‍यान सुनो धनुधारी, गारी मिथिला की

बलशाली कहं जग यश गावे, तोड़त सुमन पसीना आवे 
अस विक्रम की बलिहारी, गारी मिथिला की
धरि ध्‍यान सुनो धनुधारी, गारी मिथिला की

भंजेउ चाप गुमान न लाओ, सिय की कृपा है भाग्‍य मनाओ 
मिलि जनकपुरी ससुरारी, गारी मिथिला की 
धरि ध्‍यान सुनो धनुधारी, गारी मिथिला की

क्षमेहु चूक राजेश जू यातें, गारी देत सिया जी के नाते 
तुम्‍हरी हम सरहज सारी, गारी मि‍थिला की 
धरि ध्‍यान सुनो धनुधारी, गारी मिथिला की

भजन अज्ञात 21/11/2023