आज दूज भैया की कहियत, कर लिये कंचन थाल के ।
करो तिलक तुम बहन सुभद्रा, बल अरु श्रीगोपाल के ।। 1 ।।
आरती करत देत न्यौछावर, वारत मुक्ता माल के ।
‘आशकरण’ प्रभु मोहन नागर, प्रेम पुंज ब्रजबाल के ।। 2 ।।