रचनाकार/कवि/भक्त: अज्ञात ( सम्प्रदाय - NA )
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ढोटा नन्दनन्दन ब्रजचन्द्र, वेष धर लियौ सुनारी कौ । 
नख सिख सों बन गये जनाने, पहुँचे जाय तुरत बरसाने ।
लेउ कोई विछुआ ब्रज की नार, सुनें प्रीतम इनकी झनकार ।
खेंचकें मनकूॅं लेय निकार, भरौ है ऐसौ जंत्र अपार ।
दोहा-
जंत्र भरे विछुआन की, रही बढ़ाई मार ।
पनघट मारग कौन ले बेचौ हाट बाजार ।।
गैल गिरारे नाय कोई गाहक, वस्तु तुम्हारी कौ। ढोटा ....

सब गहनौ मेरौ रतन जड़ाऊ हाट बजारन नाय बिकाऊॅं ।
कौन जानें गहने की सार, परख कोई करै राज दरबार ।
सखी एक बोली सोच विचार, चपल चंचल तू सामलनार ।
दोहा-
कारेन को परतीत ना कारों नन्द कुमार ।
वाही की तू मिलनियाँ वाही को उनहार ।।
कबहू ना विश्वास करें, कारे नर नारी कौ । ढोटा ....

चली सुनारी संग सखियन में। 
पहुंची प्यारी के महलन में ।।
पॉंव लग बैठ गई हरसाय, कहा राधें जू नें समझाय।
कहा लाइ सो हमें दिखाय तेरौ सब माल मता विकजाय।।
दोहा-
डिब्बा कूॅं खोलन लगी, प्रेम प्रभाव सुभाव।
प्यारी जी तुम पहिरिये, गहने रतन जड़ाव।।
सुनकें आई नाम दूरते राधा प्यारी कौ ।  ढोटा ....

शीशफूल बंदनी धराई जी । श्रवण झुमका नथ पहराईजी।
नार हेँसली हमेल हिय हार । वारौ वाजूवन्द देत बहार।।
कंकनियाँ गजरे पहोंची डार। आरसी मुदरी छल्लादार ।।
दोहा-
कड़े छडे़ लच्छे पड़े, जडे़ बड़े पुखराज ।
विछुआ पहरे बाजने कोट काम गये लाज ।।
सतगुन खिलौ सुहाग, श्री बृषभान दुलारी कौ । ढोटा ....

ले दरपन राधा मुसक्‍याई । ललिता कूॅं ऐसे समझाई ।
ये गहने लाई रुचिर वनाय। होय सब सौदा लेओ मुल्लाय ।
जो मांगेसो तुम देऔ गहाय । लई गठरी ललिता खुलवाय।
दोहा-
गठरी के गहनेन, में बन्दी पर गई हाथ । 
नाय सुनारी ये भटू, ढोटा गोकुल नाथ ।।
देखौ री देखौ वहिना छल छैल बिहारी कौ। ढोटा ....

कोई लियौ चीर कोई लई चोली जी । 
कोई मुख गुलचा दै हँस बोली जी ।।
काउने फेंटा दियौ वधाय । कोई पीताम्वर रही कछाय ।
छटी जब पुजी जसोदा माय, महूरत कौन घड़ी गयौ आय।
दोहा-
भादों की कारी निशा, जन्मे नन्दकिशोर ।
गोरस चोरी छोडकै अब भये रस के चोर ।।
सखियन करो खिलौना, छौना जसुमति दारी कौ। ढोटा ....

पर गए श्याम सखिन के बस में जी।
प्रेम रसीले है रहे रस में जी ।।
प्रेम कौ पायौ परम प्रसाद, प्रेम परसाद में बड-2 स्वाद।
प्रेम में टूट जाय मरियाद, प्रेंम चल आयौ आदि अनादि।।
दोहा-
प्रेम परीक्षा में गयौ, बासरबीत तमाम।
मिले परस्पर प्रेम ते, भुजमर श्याम श्याम।।
घासीराम नाम रट छीतर श्रीगिरधारी कौ। ढोटा ....

रसिया अज्ञात 11/11/2023

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रसिया अज्ञात 11/11/2023

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{ श्री राधाअष्टमी श्रंगार आरती दर्शन ||
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- सबको बहुत बहुत मंगल बधाई हो बधाई हो ॥
कुँवरि  जनमत ही ब्रज-जन फूले तन-मन माई। 
श्री बरसाने गोपराज घर बाजत सुनि है बधाई।।टेक।। 
रानी जग जानी श्री कीरति भाग भरी छबि छाई। 
रूप प्रेम रस अबधि मुख सुखनिधि कन्या जाई।। 
सदन-सदन आनँद महा मंगल शोभा कही न जाई। 
नर नारी हरषे सब ऐसें मनौं रंग निधि पाई।।1।। 
बनि-बनि बनिता भवन-भवन तें चलीं जुरि छबि सौं
राजैं वदन चन्द आंनन्द भरे मानोैं हाथन थार विराजेैं।। 
सौरभ जल सींची बीथी महमहात मन मोहैं।
चंचल गति दामिनी सी भामिनि गावत गीतन सोहैं।।2।। 
आईं श्रीवृषभान भवन जहाँ ऊँचे अटा-अटारी। 
कनक कलश पर धुजा पताका जगमगात छबि न्यारी।। 
बाजत द्वारें ताल पखावत गोमुख दुन्दुभि भेरी। 
गोप कुमार मैन से डोलत बोलत देै-देै हेरी।। 3।। 
कंचन धरनी मणिमय आँगन रँग भरी नारी नाचैं। 
हरषेैं बरषे दधि घृत हरदी छिरकत काहू न बाचेैं।। 
इक गहि चौबा चंदन छिरकेैं इक पय भाजन ढारेैं। 
एक परस्पर माखन लै-लै तकि-तकि हँसि-हँसि मारैं।। 4।। 
इक गावैं एक जंत्र बजावैं इक लै भेटन आवैं। 
इक निकसेैं एक पैठेैं मंदिर निरखि लली सुख पावैं। 
इक कीरति के चरणन गहि-गहि धनि-धनि वचन उचारेैं। 
एक कुंवरि कौ रूप विलोकत तन-मन धन कौं वारेैं।। 5।। 
एक रहीं इकटक लखि शोभा इक तन फूली डोलेैं। 
इक दिखि आवैं आँगन छबि सौं जै-जै बानी बोलेैं।। 
इक पुनि लै-लै मन्दिर में तें गोरस घट ढरकावेैं। 
बहे पनारे न्यारे-न्यारे वीथिन कीच मचावैं।।6।। 
कनक भीत विद्रुम मणि देहरि नग खचे खंभ विराजैं 
लटकत तोरन रतन जगमगैं हाटक फाटक राजैं।।
कहा कहौं सुन्दर मंदिर की सोभा कहत न आवै।
दमकत बनितत के तन चंचल प्रतिविंबित दरसावैं।। 7।।
चारु चँदोवा मुक्ता झालर घर-घर आँगन सोहैं। 
झलमलाइ रही चहुँ दिसि सोभा जो मोहैं। 
को कवि बरनैं महा महोत्सव सुर तिय हिय सरसाने। 
निर्त्तत गावत कुसुमन बरषत सुन्दर श्री बरषने।। 8।। 
बाबा नन्द रु महरि जसोद सुनि-सुनि अति हरषाहीं। 
नन्दलला आनन्द भयौ मन फूले मन हीं माहीं।। 
द्विज मागत बंदीजन फूले जै-जै बानी राजैं। 
गोप सभा के मध्य नृपति मणि श्रीवृषभान विराजैं।।9।। 
जहाँ तहाँ जाकी चलत सुधा-सी निर्मल सुजस कहानी। 
इन्द्र समान सबन पर वरषेैं मुदित बड़ दानी।। 
विप्रन धेनु दई बहु विधि सौं कनक सींग खुर रूपे। 
निरधन धनी किये धन देै-देै देत विचार न भूपेै।।10।। 
भ्राता बन्धु सबै पहिराये देै केसर के टीके। 
भये बिदा सुख भीजे तन मन चलत बिराजत नीके।। 
दान मान सबहिनु कौं दीनोैं जुवती जन पहिराई। 
मुक्तामणि मय कंचन भूषन सारी सुरंग सुहाई।। 11।। 
सब काहू कौं मोद बढ्योै अति भयौ जु मन कौ भायोै। 
पुर-पुर घर-घर नर नारिनु मिलि लोक-लोक जस गायोै।। 
श्रीराधा रसिकन की जीवन प्रगटी सब सुखदाई। 
दामोदर हित श्रीवृन्दावन वास बधाई  पाई।।11।। 43।।

भजन अज्ञात 13/03/2023

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ऐसे बस्तर तन पे धारौ जासों धूप लगे ना जाड़ौ ।
करो तुम निर्गुण को श्रृंगार, बाँध लेेऔ पाग प्रेम अनुसार।
शील कौ स्वाफा शीश सम्हार।।
दोहा-
अमल अंगरखा अंग मैं, आदि ब्रह्म आधार ।
पीत पिछौरा पीयरौ, लै कन्धा पै डार।।

धर्म धोवती काछ अन्त में धर्म हो आवै आड़ौ । ऐसे .....

बगल दाबौ दया दुशाल, सत्य को सेला लाल गुलाल ।
राम रंग रंग्यो भयौ रूमाल ।।
दोहा-
पाजामा लै पहरकै, जो पूरौ प्रणपाल ।
नारौ डारौ नैम कौ, खोलौ करौ त्रिकाल ।।
पर उपकार पंथ में प्रानी, कमर बाँध है ठाड़ौ । ऐसे .....

लेओ परमार पलंग बिछाय, गेंदुआ ज्ञान कौ लैओ लगाय ।
सबर सन्तोषी सौर भराय ।।

दोहा-
ऐसे निर्गुण ब्रह्म जो, तन पै लेय सजाय।
ग्रीषम पावस ऋतु कोई, उनकूं नाँय सताय।।
उनकूॅं नांय सताय, सुयश कौ बजतौ रहे नगाड़ौ। ऐसे .....
वस्त्र यह फटें न होंय मलीन, बने रहते हैं सदा नवीन।
पहर हरि में है जाय लौलीन ।।
दोहा-
छीतरमल के छन्द की, करौ गुनीजन चीन ।
भूल चूक होय  सोध कर लीजै चतुर प्रवीन ।।
गोवरधन दसबिसे बीच में, घासीराम अखाड़ौ । ऐसे .....

रसिया अज्ञात 14/11/2023

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अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
 
पतितो को पावन करते कृपानिधि,
पतितो को पावन करते कृपानिधि,
किए पाप है इस सुयश के सहारे,
किए पाप है इस सुयश के सहारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
 
हमारे लिए क्यों देर किए हो,
हमारे लिए क्यों देर किए हो,
गणिका अजामिल को पल भर मे तारे ,
गणिका अजामिल को पल भर मे तारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
 
 
माना अगम है अपावन कुटिल है,
माना अगम है अपावन कुटिल है,
सबकुछ है लेकिन है भगवन तुम्हारे,
सबकुछ है लेकिन है भगवन तुम्हारे,
अगर नाथ देखोंगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
 
मन होगा निर्मल तुम्हारी कृपा से 
मन होगा निर्मल तुम्हारी कृपा से 
मन होगा निर्मल तुम्हारी कृपा से 
इसे शुद्ध करने मेराजेश हारे
 
अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे ॥
 
भजन अज्ञात 07/09/2023

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