गोवर्धन पूजन चलेरी गोपाल l
मत्त गयंद देख जिय लज्जित निरख मंदगति चाल ll
व्रज नारिन पकवान बहुत कर भर भर लीने थाल l
अंग सुगंध पहर पट भूषण गावत गीत रसाल ll
बाजे अनेक वेणु रवसो मिलि चलत विविध सुर ताल l
ध्वजा पताका छत्र चमर धर करत कुलाहल ग्वाल ll
बालक वृंद चंहुदिश सोहत मानो कमल अलिमाल l
कुंभनदास प्रभु त्रिभुवन मोहन गोवर्धनधर लाल ll