खिचरी जेंवत जुगल किशोर।
निसि जागे अनुरागे दम्पति, उठे उनीदे भोर।।
अंग-अंग की छवि अवलोकत ग्रास लेत मुख सुखहि निहोर।
जै श्रीरुपलाल हित ललित त्रिभंगी विवि मुख चन्द्र चकोर।।